ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। मुंबई से पुणे के बीच सफर करने वाले यात्री 1 मई से अपने गंतव्य स्थान तक 25 मिनट पहले पहुंच सकेंगे। यात्रियों का सफर कम समय में पूरा कराने के लिए सह्याद्रि के दो पर्वत के बीच देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार करने का काम 99.9 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) 1 मई को मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर बने 13.3 किमी लंबे मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट को आम गाड़ियों के लिए खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रॉजेक्ट के तहत दो पहाड़ों के बीच मार्ग तैयार करने के लिए 182 मीटर ऊंचा केबल ब्रिज तैयार किया गया है। 182 ऊंचे ब्रिज पर गाड़ियां 132 मीटर की ऊंचाई से गुजरेंगी।
मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट के माध्यम से पहाड़ के बीच रास्ता तैयार किया जा रहा है। ऐसा कर एमएसआरडीसी ने मुंबई- पुणे एक्सप्रेस वे की दूरी 6 किमी घटा दी है। नया रास्ता तैयार होने से वाहन चालकों को पहाड़ का चक्क र लगाते हुए आगे नहीं बढ़ना नहीं पड़ेगा। सीधी सड़क होने से गाड़ियां तेजी से आगे बढ़ पाएगीं।
देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार करने वाली अफकॉन्स कंपनी के अनुसार, ब्रिज 99.9 फीसदी तक बन कर तैयार हो चुका है। अब केवल अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है। सरकार 1 मई तक ब्रिज को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल सकती है।
क्या है मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट?
गौजूदा समय में एक्सप्रेस वे पर खोपोली एक्जिट से सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच की दूरी 19 किमी है। मिसिंग लिक के बन जाने से 19 किमी की दूरी घट कर 13.3 किमी में सिमट जाएगी। पॉजेक्ट के तहत दो टनल और दो केबल ब्रिज बनाए गए है। 13.33 किमी के कुल मार्ग में से 11 किमी लबी टनल और करीब 2 किमी का केबल ब्रिज है। करीब 850 नीटर लंबे और 26 मीटर चौड़े दो केवल ब्रिज का निर्माण दो चरण में किया गया है।
डेडलाइन मिस कर बना मिसिंग लिंक
मिसिंग लिक प्रॉजेक्ट के तहत टनल तैयार करने का काम कई महीने पहले पूरा किया जा चुका था लेकिन इसे बनाने में आ रही चुनौतियों की वजह से 2024 में तैयार होने वाला ब्रिज अब बन पाया। पहले इसकी डेडलाइन मार्च 2024, फिर जनवरी 2025, फिर मार्च 2025 रखी गई थी। ब्रिज का निर्माण ऐसे स्थान पर किया गया है, जहां सब कुछ मौसम पर निर्भर होता था। हवा की रफ्तार अधिक होने, कोहरा होने पर काम रोकना पड़ता था।













