ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। मुंबई में पुरानी और जर्जर बिल्डिंगों के रीडेवलपमेंट ने चालू वित्त वर्ष के आरंभ से ही रफ्तार पकड़ ली है। अप्रैल से अब तक 70 हाउसिंग सोसायटियों ने बिल्डरों के साथ डेवलपर एग्रीमेंट (डीए) कर लिया है। यह संख्या पूरे 2025 में हुए कुल समझौतों की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा नियमों को आसान बनाए जाने से रीडेवलपमेंट परियोजनाओं को गति मिली है।
1094 सोसायटी में प्रक्रिया जारी
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में वर्तमान में 1,094 सोसायटियों में रीडिवेलपमेंट की प्रक्रिया जारी है। इन परियोजनाओं के तहत 432 एकड़ क्षेत्र में नए आवास विकसित किए जा रहे है। अनुमान है कि 2031 तक रीडिवेलपमेंट के जरिए करीब 59 हजार नए घर तैयार होंगे। इन परियोजनाओं से सरकार को 9,115 करोड़ रुपये से अधिक की स्टैंप ड्यूटी मिलने की संभावना है। मुंबई में जमीन की कमी और बढ़ती आबादी के बीच रीडेवलपमेंट शहर के लिए नए घरों का सबसे बड़ा स्रोत बनता जा रहा है।
इमारतों को ऑडिट की जरूरत
मुंबई में करीब 1.6 लाख बिल्डिंग 30 साल से अधिक पुरानी हैं, जिनको स्ट्रक्चर ऑडिट कराने के लिए कहा गया है। सबसे अधिक 46 फीसदी बिल्डिंग पश्चिमी उपनगरों में है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन निदेशक शिशिर बैजल के अनुसार, रीडेवलपमेंट से न केवल नए घरों की आपूर्ति बढ़ेगी, बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास और आवासीय गुणवत्ता के विकास गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
सेराटेक ग्रुप के प्रबंध निदेशक आनंद अग्रवाल के अनुसार, नियमों को सरल बनाने और सोसायटी सदस्यों के लिए नए घर पर स्टैप ड्यूटी शुल्क मात्र 1,000 रुपये तय किए जाने से रीडेवलपमेंट परियोजनाओं को नई गति मिली है।













