ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज सुल्तानपुर रोड पर गुलजार उपवन में ब्रह्माकुमारीज के समागम में राजयोग प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति 20 साल से ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी हैं। उन्होंने समागम में कहा- आज के समय में आगे बढ़ने की नहीं, अपने भीतर झांकने की जरूरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य शिक्षा भी इसी दिशा में एक कदम है। जी-20 समिट भारत में 2023 में आयोजित किया गया था। उसकी थीम थी ‘वन वर्ल्ड, वन अर्थ, वन फैमिली’। इन सब प्रयासों का उद्देश्य विश्व को एकता का संदेश देना रहा। यही काम ब्रह्माकुमारीज कर रही हैं। संस्था का काम प्रशंसनीय है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव का क्षण है कि ध्यान योग को लेकर हम इतना बड़ा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति की मौजूदगी हमारे लिए गौरव की बात है। शिक्षक के रूप में उनकी भूमिका बहुत अहम रही। उन्होंने पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का सफर तय किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इस बड़े अभियान के लिए बधाई। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का आप सभी प्रचार कर रहे हैं। यह केंद्र समाज को जोड़ने अहम भूमिका निभाएगा। इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्ष 1937 में जब समाज व्याधियों से व्यथित था, ऐसे समय में इस संस्थान की नींव रखी गई।
यह संस्था विभिन्न आयामों से राष्ट्र निर्माण की गतिविधियां निभा रही है। विश्व की यह विशाल संस्था नारी शक्ति द्वारा संचालित है। राजयोग मेडिटेशन वह साधन है जो व्यक्ति को सद्गुण की ओर अग्रसर करता है।
आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु
का डर पीछे छूट जाता है
राज्यपाल ने आगे कहा कि ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना चुनौतीपूर्ण समय में हुई, जो वैश्विक चेतना का आरंभ था। विश्व शांति के लिए राजयोग बहुत जरूरी है। स्व परिवर्तन से ही जगत के परिवर्तन का रास्ता मिलता है। परिस्थितियों को दोष देने की प्रवत्ति पीछे छूट जाती है। आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु का डर भी पीछे छूट जाता है।































