ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। मोदी सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020 ) की चर्चा विदेशों में हो रही है। एनईपी के तहत करीब 36 साल बाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में से एक ऑक्सफोर्ड के स्टूडेंट ने यूनाइटेड नेशनल (यूएन) में भारत की नई शिक्षा नीति की तारीख की है। साथ ही भारत के एजुकेशन सिस्टम में चार बड़े बदलावों की सराहना की है।
यूनाइटेड नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल के 61वें सेशन के दौरान लक्जमबर्ग के नागरिक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल डेवलपमेंट के स्टूडेंट्स जैन ह्यूबेल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव लाने को लेकर तारीफ की है।
इनकी प्रशंसा
जैन का कहा कि बड़े स्तर पर स्टूडेंट्स तक स्किल्स बेस्ड एजुकेशन की पहुंच बढ़ाने के भारत के प्रयास, ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के उन अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकते हैं, जो अपने एजुकेशन सिस्टम में सुधार करना चाहते हैं। ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट ने मुख्यतौर पर 4 चीजों की तारीफ की। इनमें वोकेशनल ट्रेनिंग एवं स्किल्स डेवलेपमेंट, स्कूलों में प्रैक्टिकल स्किल्स को शामिल करना, पिछड़े व कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए नई पहल और शिक्षा को रोजगार और स्किल्स से जोड़ने की कोशिश।
वोकेशन ट्रेनिंग और स्किल डेवलेपमेंट
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मास्टर्स के स्टूडेंट जैन ह्यूबेल ने कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति में वोकेशनल ट्रेनिंग और स्किल्स डेलवलेपमेंट पर जोर दिया है, जो छात्रों को भविष्य के लिए एक प्रैक्टिकल बेस तैयार करती है। उनके अनुसार, यह सोच युवाओं को न केवल रोजगार पाने के लिए प्रोत्साहित करता है, बल्कि उनमें उद्यमिता की महत्वाकांक्षाएं जगाता है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करता है।
स्कूलों में प्रैक्टिकल स्किल्स को जोड़ना
गुवाहाटी में अक्षर फाउंडेशन के साथ काम करने के दौरान जैन ने देखा कि कैसे वोकेशनल ट्रेनिंग को क्लास की पढ़ाई के साथ जोड़ा गया था। स्टूडेंट्स को बिजनेस मैनेजमेंट, अकाउंटिंग और पब्लिक रिलेशन जैसी प्रैक्टिकल स्किल्स के बारे में सिखाया जा रहा है। जैन का मानना है कि स्टूडेंट्स को इससे इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटी और प्रोफेशनल लाइफ के लिए होने में मदद मिलती है।
कमजोर व पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बदलाव
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में जैन ह्यूबेल ने जोर देकर कहा कि ऐसी पहल छात्रों के लिए, विशेष रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग से आने वाले छात्रों के लिए, एक बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती हैं। छात्रों को प्रैक्टिकल एजुकेशन से लैस करके, वोकेशन एजुकेशन उन्हें आत्मनिर्भर बनने और रोजमर्रा की आर्थिक चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने में मदद करती है। स्कूल लेवल पर रोजगार और आजीविका से जुड़े स्किल्स शामिल करना युवाओं को बेरोजगारी से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वे कहते हैं कि अगर स्टूडेंट्स को एकेडमिक नॉलेज के साथ प्रैक्टिकल एक्सपर्टीज भी दी जाए, तो इससे शिक्षा और जॉब मार्केट के बीच अंतर कम किया जा सकता है और भारत का यही मॉडल दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। 2023 में, जैन ह्यूबेल ने अक्षर फाउंडेशन के साथ आक्सफोर्ड इंटर्नशिप प्रोग्राम पूरा किया, जहां सरकारी स्कूलों में फाउंडेशन के इंडियन एजुकेशन माडल को लागू करने के लिए काम किया, यह मॉडल एनईपी 2020 पर आधारित था। बाद में, उन्होंने हांगकांग में पढ़ाया और राजस्थान के बनस्थली विद्यापीठ में भी लेक्चर दिए।













