ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी पीएफ पर 8.25% की दर से ही ब्याज मिलता रहेगा। सरकार ने ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के इस फैसले पर अब वित्त मंत्रालय की मुहर लगेगी, जिसके बाद कर्मचारियों के खातों में पैसा क्रेडिट होगा।
आम तौर पर सीबीटी की घोषणा के कुछ महीनों बाद ब्याज की रकम खातों में जमा की जाती है। पिछले रिकॉर्ड को देखें तो यह पैसा हर साल जून से सितंबर के बीच क्रेडिट होता है।
उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2024-25 का ब्याज जुलाई 2025 में खातों में डाला गया था। हालांकि, इसकी कोई तय तारीख नहीं है। इसलिए समय-समय पर अपना बैलेंस चेक करें।
देरी होने पर भी नहीं होगा ब्याज का नुकसान
अक्सर सब्सक्राइबर्स को चिंता रहती है कि अगर ब्याज क्रेडिट होने में देरी होती है, तो क्या उन्हें नुकसान होगा? ईपीएफओ ने साफ किया है कि ब्याज क्रेडिट होने में देरी से मेंबर्स को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होता है। नवंबर 2024 में बदले गए नियमों के मुताबिक, अब सेटलमेंट की तारीख तक का पूरा ब्याज दिया जाता है, जबकि पहले केवल पिछले महीने तक का ही ब्याज मिलता था।
‘पासबुक लाइट’ से चेक करें अपना बैलेंस
ईपीएफओ ने बैलेंस चेक करने के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर शुरू किया है।
ईपीएफओ की वेबसाइट पर जाएं और यूएएन के जरिए लॉगिन करें।
ऊपर बाईं ओर ‘View’ विकल्प पर क्लिक करें।
ड्रॉप डाउन मेनू से ‘Passbook Lite’ चुनें।
यहां आप अपने पिछले 5 योगदानों को देख सकते हैं।
पूरी जानकारी के लिए मेंबर आईडी चुनकर ‘View Passbook’ पर क्लिक करें।
1952 में 3% ब्याज से शुरुआत हुई थी
1952 में पीएफ पर ब्याज दर केवल 3% थी। इसके बाद इसमें बढ़ोतरी होती गई।
1972 में यह 6% और 1984 में यह पहली बार 10% के ऊपर पहुंच गई।
पीएफ धारकों को 1989 से 1999 के दौरान सबसे ज्यादा 12% ब्याज मिलता था।
1999 के बाद ब्याज दर कभी भी 10% के करीब नहीं पहुंची।
2001 के बाद से यह 9.50% के नीचे ही रही है।
पिछले सात सालों से यह 8.5% या उससे कम रही है।
फाइनेंशियल ईयर के आखिर में तय होती है ब्याज दर।
पीएफ में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैसों के बारे में हिसाब देती है। इसके बाद सीबीटी की बैठक होती है। सीबीटी के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय सहमति के बाद ब्याज दर लागू करता है। ब्याज दर पर फैसला फाइनेंशियल ईयर के आखिर में होता है।
| वर्ष | ब्याज दर |
|---|---|
| 2024-25 | 8.25% |
| 2023-24 | 8.25% |
| 2022-23 | 8.15% |
| 2021-22 | 8.10% |
| 2020-21 | 8.50% |













