ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच जो 27 अहम समझौते हुए हैं, वो पीएम मोदी और नेतन्याहू की पर्सनल केमिस्ट्री का नतीजा हैं। भारत के लिए इजरायल टाइम-टेस्टेड पार्टनर हैं और दोनों मुल्कों के मजबूत रिश्तों के पीछे एक गजब का संयोग है। बीते दिन इजरायली संसद को संबोधित करते वक्त पीएम मोदी ने अतीत के पन्नों को पलटा और अपने जन्मदिन की तारीख याद दिलाते हुए इजरायल-भारत के रिश्तों की नींव से जुड़ा एक किस्सा सुनाया।
बता दें कि भारत और इजरायल, अमेरिका व यूएई के साथ मिलकर आई2यू2 समूह में काम कर रहे हैं जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग बढ़ाना है। इसके अलावा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) के जरिए आर्थिक संपर्क और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी साझेदारी बढ़ रही है। पीएम मोदी की यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। गाजा संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भारत ने संतुलित रुख अपनाया है- एक ओर आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश तो दूसरी ओर मानवीय सहायता और शांति प्रक्रिया का समर्थन।
समझौतों की 5 बड़ी बातें
सरकार के अनुसार, इन समझौतों का दायरा साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि नवाचार, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मुक्त व्यापार तक फैला हुआ है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
1. साइबर सुरक्षा सहयोग: इजरायल भारत में अत्याधुनिक साइबर सिक्योरिटी सेंटर स्थापित करने में सहयोग करेगा। इससे साइबर हमलों की रोकथाम, नेटवर्क मॉनिटरिंग और डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी।
2. एआई आधारित शिक्षा: स्कूलों खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक एआई तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री पहुंचाने में इजरायली तकनीक का उपयोग होगा। इससे डिजिटल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा।
3. एग्रीकल्चर इनोवेशन सेंटर: इजरायल भारत में एग्रीकल्चर इनोवेशन सेंटर स्थापित करेगा। ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट फार्मिंग और उन्नत बीज तकनीक के जरिए फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
4. रक्षा और एडवांस टेकनोलॉजी: ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस, रोबोटिक्स और संयुक्त उत्पादन (जॉइंट डेवलपमेंट) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश रक्षा प्रौद्योगिकी के साझा विकास और ट्रांसफर पर भी सहमत हुए हैं।
5. मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए): दोनों देशों ने जल्द मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। इससे निवेश, निर्यात और टेक्नोलॉजी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

























