राजेश दुबे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट से कहा है कि वे ट्रायल कोर्ट के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करें, ताकि देश में एसिड अटैक से जुड़े मामलों की सुनवाई जल्द पूरी हो सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिक सक्रिय और संवेदनशील नजरिये की जरूरत है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने विभिन्न हाईकोर्ट द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया, जिनमें लंबित मामलों और उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी दी गई थी।
अदालत ने निर्देश दिया कि एसिड अटैक मामलों की सुनवाई की निगरानी की जिम्मेदारी उन हाई कोर्ट जजों को सौंपी जाए, जो ट्रायल कोर्ट के प्रशासनिक प्रभारी हैं।
पीठ ने राज्यों को अंतिम अवसर देते हुए कहा कि वे एसिड अटैक पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देने से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। यह सुनवाई हरियाणा की रहने वाली एसिड अटैक पीड़िता शहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका पर हो रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मलिक से उनके व्यक्तिगत मामले की स्थिति भी पूछी। उन्होंने बताया कि रोहिणी ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की गई है। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से अनुरोध किया कि वे इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में पीड़िता का प्रतिनिधित्व निशुल्क करें। लूथरा ने सहमति जताई।
एक मामला दिल्ली की साकेत कोर्ट भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में हरियाणा के भिवानी की अदालत से चल रहे आपराधिक मुकदमे को दिल्ली के साकेत कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश भी दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसके लिए हरियाणा में कार्यवाही में शामिल होना मुश्किल है।
केंद्र-राज्यों से भी जानकारी मांगी
अदालत ने केंद्र और राज्यों से एसिड अटैक मामलों में विस्तृत जानकारी मांगी है। वर्षवार संख्या, लंबित मुकदमे, चार्जशीट दाखिल होने की स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदम शामिल है।
यह है स्थिति
उत्तर प्रदेश में 198, पश्चिम बंगाल में 60, गुजरात में 114, बिहार में 68 और महाराष्ट्र में 58 एसिड अटैक मामले लंबित हैं। कोर्ट ने पहले भी धीमी सुनवाई पर चिंता जताई थी।













