ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जामिया नगर में अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने ओखला गांव में खाता नंबर 279 में 4 बीघा से ज्यादा जमीन पर बनी इमारतों को गिराने के लिए तीन महीने का समय दिया है।
कोर्ट ने दिल्ली विकास अथॉरिटी को तीन महीने में आदेश को पूरा करने के लिए निर्देश दिए हैं। दो जस्टिस की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां ने आवामी जमीन पर बिना रजिस्ट्रेशन के बनी इमारतों पर यह फैसला लिया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में प्रशासन को निर्देश दिया है कि किसी भी इमारत को गिराने से 15 दिन पहले वहां रहने वाले व्यक्ति को नोटिस दिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन लोगों को नोटिस मिलेगा, वे कानून के मुताबिक कानूनी कदम उठाने के लिए आजाद हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका ओखला नगर के खाता नंबर 279 में बने अवैध निर्माणों के संबंध में दायर की गई है। डीडीए ने 15 मार्च 2025 को दायर हलफनामे में कहा था कि वह निर्माणों को तोड़ने की कार्यवाही नहीं कर सकता, क्योंकि उसे जमीन का कब्जा नहीं मिला है। इसकी कार्यवाही करते हुए कोर्ट ने पाया कि डीडीए तब तक कार्रवाई नहीं कर सकता, जब तक की जमीन उसे न सौंप दी जाए।
कोर्ट ने 8 मई को डीडीए और राज्य सरकार को अपने-अपने इलाकों में अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया। कार्यवाही में कोर्ट ने पाया कि डिमार्क इलाका 34 बीघा और 8 बिस्वा है। इनमें से 13 बीघा और 14 बिस्वा खाली है, जिस पर कार्रवाई करने की कोई जरूरत नहीं है।
2018 में हुई सुनवाई
यूनियन ऑफ इंडिया मामले में हुई सुनवाई में कोर्ट ने पाया था कि दिल्ली में कई आवामी जमीन और कई कॉलोनियों में अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर हुए है, जिसके बाद कोर्ट ने इलाकों में निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह से रोक दिया था और निगरानी के लिए फोर्स का भी गठन किया था।

























