ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। ठाणे में भी मुंबई की तर्ज पर कोस्टल रोड बन रहा है, जिससे घोड़बंदर रोड पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को निजात मिलने की उम्मीद है। बालकुंभ से गायमुख के बीच बन रहा 13.45 किलोमीटर लंबा 6 लेन का ठाणे कोस्टल रोड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा। 3,364 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का काम मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने आठ महीने शुरू किया था।
आठ महीने के भीतर ही प्राधिकरण ने कोस्टल रोड का फाउंडेशन वर्क 50 फीसदी तक पूरा कर लिया है। फाउंडेशन वर्क के बाद पिलर पर पिलर कैप और आई गर्डर रखने का काम शुरू हो गया है।
एमएमआरडीए के मुताबिक, ठाणे कोस्टल रोड देश का पहला ग्रीन फील्ड कोस्टल रोड प्रोजेक्ट है। इस परियोजना में पहली बार मोनोपाइल फाउंडेशन, सिंगल पाइल और सिंगल पिलर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए और मैंग्रोव क्षेत्र को बचाने के लिए सड़क के बड़े हिस्से को फ्लाईओवर के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुंबई-नाशिक हाईवे से आने-जाने वालों को बड़ी राहत
इस मार्ग को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। कोस्टल रोड के शुरू होने से मुंबई-नाशिक हाईवे से आने-जाने वाले वाहनों को एक अतिरिक्त वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। पीक ऑवर के दौरान घोडबंदर रोड पर गाड़ियों की लंबी कतार लगना आम बात है। भिवंडी और कलवा की दिशा से घोडबंदर रोड की तरफ जाने वाले वाहन चालक बालकुंभ के करीब ही ट्रैफिक में फंस जाते हैं। यदि हाईवे पर कोई वाहन खराब हो जाए या दुर्घटना हो जाए तो कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती है। कोस्टल रोड बनने के बाद नाशिक, भिवंडी, गुजरात और मुंबई उपनगरों की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। बालकुंभ से सीधे कोस्टल रोड पर प्रवेश संभव होगा।
























