ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में बीमा दावों (क्लेम्स) के अप्रूवल के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जाएगा। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) ने इसके पायलट प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को चुना है। यूपी में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्पि्रहेंसिव हेल्थ ऐंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) जल्द ही एक ऑटो एडजुडिकेटिंग सिस्टम विकसित करेगा।
इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर बीमा क्लेम अप्रूवल की प्रक्रिया में तेजी आएगी और इसके लिए डॉक्टरों की भारी टीम की आवश्यकता भी खत्म हो जाएगी।
पहले चरण में किडनी के क्लेम्स
योजना के पहले चरण में किडनी से जुड़ी बीमारियों के क्लेम्स एआई के जरिए अप्रूव किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार उप्र में आयुष्मान योजना के तहत सबसे अधिक डायलिसिस क्लेम्स दायर होते हैं। इसके बाद क्रमशः आर्थो, हार्ट और पेट से जुड़ी बीमारियों को इस सिस्टम में शामिल किया जाएगा।
बीमा क्लेम के प्रत्येक दावे में दस से अधिक दस्तावेज लगते हैं जिनकी मैनुअल जांच के लिए डॉक्टरों की टीम लगती है। इसके कारण क्लेम अप्रूवल में समय लगता था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले साल तक लंबित क्लेम्स की संख्या 10 लाख से अधिक थी।
ऑडिट में भी एआई करेगा मदद
उत्तर प्रदेश में बीमा क्लेम्स के ऑडिट में भी एआई की मदद ली जाएगी। एनएचए ने साचीज को इसके लिए मंजूरी दे दी है। इस मॉडल के लागू होने के बाद ऐसे अस्पतालों की पहचान करना आसान होगा जिनके पुराने या नए क्लेम्स में संदिग्ध या अधूरे दस्तावेज होते हैं। साचीज ने ऑडिटिंग प्रणाली में भी बदलाव किए हैं। पिछले साल मेडिकल ऑडिटर्स की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 की गई और आईएसए (इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी) स्तर पर सीपीडी की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की गई।
कॉल सेंटर भी एआई पावर्ड
ऑटो एडजुडिकेटिंग सिस्टम के साथ ही कॉल सेंटर में भी सवाल-जवाब की प्रक्रिया एआई की मदद से होगी। इस समय कॉल सेंटर मैन्युअली हैंडल होता है जिसमें कर्मचारी कार्ड धारकों से चुनिंदा सवाल पूछकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। एआई पावर्ड कॉल सेंटर में बेहतर सवाल-जवाब होंगे और लाभार्थी से मिले जवाबों के आधार पर तुरंत रिपोर्ट भी तैयार हो जाएगी।
हर महीने दो लाख से अधिक क्लेम्स
अर्चना वर्मा के अनुसार, हर महीने लगभग 2 लाख से अधिक क्लेम्स रजिस्टर्ड अस्पतालों से आते हैं। पुराने लंबित क्लेम्स के साथ नए क्लेम्स को समय पर निपटाना साचीज के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच 8 लाख से ज्यादा क्लेम्स निस्तारित किए गए और लगभग 4649 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।







