ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। आठ मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले यूपी की योगी सरकार ने बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया है। सीएम योगी के निर्देश पर उन्नाव, कानपुर नगर, रायबरेली, अयोध्या, रामपुर समेत यूपी के 42 जिलों के सभी सरकारी स्कूलों में बने शौचालयों को पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि आठ मार्च तक सभी विद्यालयों के शौचालय उपयोग योग्य स्थिति में होने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि केवल निर्माण कार्य पूरा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शौचालयों में स्वच्छता, नियमित सफाई, जल की उपलब्धता, बिजली व्यवस्था और सुरक्षित दरवाजों की स्थिति भी सुनिश्चित की जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार का विशेष फोकस स्कूल में छात्राओं के लिए पृथक एवं सुरक्षित शौचालयों की उपलब्धता पर है। यहीं नहीं, अधिकारियों का यह भी मानना है कि स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय सुविधा मिलने से छात्राओं की विद्यालय में उपस्थिति बढ़ेगी, मासिक धर्म के दौरान सहजता होगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। महिला दिवस के अवसर पर यह पहल बेटियों को सम्मानजनक शैक्षिक वातावरण देने की प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।
अधिकारियों को भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शौचालयों की वास्तविक स्थिति की मॉनिटरिंग के लिए प्रेरणा पोर्टल पर फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक विद्यालय को शौचालय के अंदर और बाहर की स्पष्ट तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। इससे शासन स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं रहेगी। इसके साथ ही इन जिलों में तैनात जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर विद्यालयों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों में मरम्मत या जल कनेक्शन की आवश्यकता है, वहां तत्काल कार्य प्रारंभ करने को कहा गया है। निर्देश में कहा गया है कि इन कामों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्य पूरा नहीं होने पर होगी कार्रवाई
योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आठ मार्च महिला दिवस की समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण न होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय की जाएगी। आवश्यक बजट और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह अभियान न केवल बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिला सशक्तीकरण और सम्मान की भावना को जमीनी स्तर पर साकार करने का प्रयास है।













