दीपक द्विवेदी
भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ अधिकाधिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के मिशन पर काम करे। तभी वह वैश्विक स्तर पर उभरने वाले संकटों से बेअसर रहेगा और किसी भी परीक्षा की घड़ी में सदैव सफल होकर निकल पाएगा।
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध से उत्पन्न संकट का प्रभाव निस्संदेह अब भारत पर भी स्पष्ट नजर आने लगा है। अभी तक सरकार का यह दावा था कि स्थिति नियंत्रण में है किंतु 1 अप्रैल को एक बार फिर कॉमर्शियल एलपीजी और विमान ईंन्धन की कीमतों में वृद्धि से स्पष्ट हो गया है कि समस्या अब अधिक गहरी होने लगी है और इसका सबसे बुरा असर आम लोगों के जीवन और जेबों पर भारी पड़ने लगा है। यदि यह युद्ध लंबा चला तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि हालात और ज्यादा खराब होने वाले हैं। हालात को समझते हुए 1 अप्रैल को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक की जिसमें इस युद्ध के मद्देनजर की जा रही तैयारियों और स्थिति की समीक्षा की गई। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित सीसीएस की यह दूसरी बैठक थी। इसमें केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर सही जानकारी पहुंचाने और जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए तालमेल, सूचना के आदान-प्रदान और संकट की स्थिति के बीच प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का मूल्यांकन किया एवं खरीफ और रबी की बुवाई के मौसम में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर मंथन किया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए सभी संभव उपाय करें।
ताजा हालात की बात करें तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम 195.50 रुपए बढ़ा दिए हैं। इससे होटल, रेस्तरां और ढाबों पर भोजन करना महंगा हो जाएगा। पिछली बार 1 मार्च को 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। घरेलू गैस की कीमत में भी 7 मार्च को 60 रुपये की बढ़त हुई थी। अगर इसकी कीमत फिर बढ़ती है तो लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अब कीमत बढ़ी तो रसोई गैस के भाव हजार रुपये के पास पहुंच जाएंगे। साथ ही पांच किलोग्राम वाले बहु-उपयोगी सिलेंडर की कीमत में भी 51 रुपये की वृद्धि हुई है और आसानी से उपलब्ध हो जाने वाला यह छोटा सिलेंडर अब सात सौ रुपये का हो गया है। इसके अलावा विमान ईंन्धन के दाम बढ़ाकर 2.07 लाख रुपए प्रति किलोलीटर से अधिक कर दिए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने इस बढ़ोतरी को घरेलू विमानन कंपनियों के लिए 8.5 फीसद तक ही सीमित रखा है। फिर भी आने वाले दिनों में हवाई यात्रा पहले के मुकाबले और महंगी होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। ईंधन की कीमतों पर पड़े असर के कारण महंगाई तो बढ़ ही रही है किंतु यह कितनी बढ़ी है, इसके आंकड़े संभवतः 14 अप्रैल तक सामने आ पाएंगे। वैसे फरवरी माह में महंगाई कुछ बढ़ी थी और मार्च में इसके 3 से 4 प्रतिशत के बीच रहने की बात कही गई है।
वैसे भारत ने सामान्य पेट्रोल और डीजल के भाव को बढ़ने से किसी तरह रोके रखा है। इसके लिए उत्पाद शुल्क घटाने का फैसला भी कारगर रहा है। सरकार चाहे तो अभी भी पेट्रोल और डीजल के भाव को बढ़ने से रोक सकती है क्योंकि अभी भी इन उत्पादों पर करीब 50 प्रतिशत टैक्स है। राज्य सरकारें अगर चाहें तो वे भी प्रति लीटर पेट्रोल पर पांच से दस रुपये की छूट दे सकती हैं। इसके साथ ही सरकारों को विकास की रफ्तार भी कायम रखनी होगी। अतः बहुत संभलकर कदम उठाने होंगे। गौर करें तो दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी भारत का प्रबंधन ठीक दिख रहा है। इसके अतिरिक्त ऐसी रिपोर्टें भी आ रही हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के कारण भारत की इंटरनेट आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत का लगभग 60 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से समुद्र के नीचे बिछी केबल्स से होकर आता है। इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से कामकाज पर असर पड़ेगा। अतः भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ अधिकाधिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के मिशन पर काम करे। तभी वह वैश्विक स्तर पर उभरने वाले संकटों से बेअसर रहेगा और किसी भी परीक्षा की घड़ी में सदैव सफल हो कर निकल पाएगा।













