पार्थ नादपारा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार की पल-पल बदलती स्थितियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा फिर से गहन चिंता का विषय बनती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अभी हाल ही में संसद के दोनों सदनों में अपने संबोधन के दौरान कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने ईरान- इजरायल -अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और महामारी के दौर के संकट के बीच तुलना की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कैसे दोनों ही स्थितियों में वैश्विक आपूर्ति श्रंखलाएं (सप्लाई चेन) बाधित हुई थीं। ठीक उसी तरह वर्तमान में भी तेल एवं गैस आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहने की आशंका बलवती है यदि पश्चिम एशिया में भड़का युद्ध शीघ्र समाप्त नहीं हुआ तो। इसलिए हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि हमने कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी एकजुट रहकर ऐसी चुनौतियों का सामना किया है। हालांकि पीएम ने किसी “लॉकडाउन” की घोषणा नहीं की लेकिन उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर “पावर लॉकडाउन” जैसी संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई।
अन्य देशों में क्या हैं हाल?
अन्य देशों में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर दौड़ाएं तो ऐसे संकटों के दूरगामी प्रभावों को समझा जा सकता है। कई देशों में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं।
श्रीलंका : स्कूल और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों में छुट्टी
बांग्लादेश : ऑनलाइन क्लासेस और तय बिजली कटौती
पाकिस्तान और फिलीपींस : सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन का वर्क वीक
वियतनाम : रिमोट वर्क को बढ़ावा
इन कदमों से साफ है कि ऊर्जा बचत को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है। कई जगह तो तेल मूल्य में भी वृद्धि की जा चुकी है।
भारत में भी क्या ऐसा डर है?
विशेषज्ञों की मानें तो हाल-फिलहाल भारत में लॉकडाउन जैसी स्थिति की संभावना नहीं है। सप्लाई में अड़चन और ईंन्धन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता अवश्य है। ऐसे माहौल में, हर लीटर ईंन्धन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना, रोजाना कार चलाने वालों और घरों तथा घर के बाहर कुकिंग गैस का प्रयोग करने वालों के लिए एक व्यावहारिक प्राथमिकता बन जाता है। यहां ड्राइविंग स्टाइल तथा कुकिंग गैस के प्रयोग संबंधी कुछ बदलाव करके अथवा कार पूलिंग करके इस अनिश्चित समय में ईंन्धन की बचत करने में नागरिक अवश्य बड़ा सहयोग कर सकते हैः-
एवरेज बढ़ानी है तो ड्राइविंग स्टाइल बदलें
ड्राइविंग का तरीका वाहन की एवरेज पर सीधा प्रभाव डालता है। बार-बार एक्सीलेरेशन, ब्रेक लगाना और तेजी से लेन बदलने की आदतें ईंन्धन की खपत बढ़ाती हैं। धीरे-धीरे गति बढ़ाना और ट्रैफिक को समझकर बिना जाम वाले मार्ग अपनाना अथवा तय स्पीड पर चलने से वाहन अच्छी एवरेज देते हैं और धन भी बचता है। इसी तरह कुकिंग गैस को भी खाना बनाने के बाद जलता हुआ न छोड़ें। ऐसे बर्तनों का प्रयोग करें जैसे कि कुकर आदि जिनमें खाना जल्दी पक जाता है। इससे भी कुकिंग गैस की बचत बढ़ेगी।
इंजन स्टार्ट रखना घाटे का सौदा
रेड लाइट अथवा बात करते हुए लंबे समय तक वाहन को बिना चलाए इंजन ऑन रखने से ईंन्धन बर्बाद होता है। आजकल ऐसे वाहन भी आने लगे हैं जिनके इंजन अपने आप बंद अथवा स्टार्ट हो जाते हैं।
वाहन की सर्विसिंग देती है लाभ
समय पर सर्विसिंग से वाहन ज्यादा बढ़िया माइलेज देते हैं। इसके लिए-टायर प्रेशर सही रखें
एयर फिल्टर साफ रहना चाहिए सर्विसिंग के समय बदलें इंजन ऑयल
ये सभी ईंन्धन की खपत कम करने में मददगार हैं और उपभोक्ता उचित ड्राइविंग स्किल्स को अपनाकर स्वयं अपने खर्च को काफी हद तक कम कर सकते हैं और इस नाम मात्र के बदलावों से सरकार की बड़ी मदद कर कते हैं क्योंकि हम 140 करोड़ से ऊपर हैं और एक पैसे की मदद भी आंकड़ों में करोड़ों की होगी।













