ब्लिट्ज ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों ने इस बार ग्रामीण लोकतंत्र की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसमें डिग्रीधारक भी हैं और ऐसे जनप्रतिनिधि भी जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। कुल 30 हजार से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों में मैट्रिक पास लोगों का दबदबा है। वहीं 443 अनपढ़ उम्मीदवार भी जीते हैं। सबसे खास बात यह है कि 53.85 फीसदी सीटों पर महिलाओं ने जीत दर्ज कर कमान संभाली है। उम्र के लिहाज से देखें तो विजयी उम्मीदवारों में 31 से 40 वर्ष के युवाओं का दबदबा रहा है।
443 निरक्षर विजयी
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पंचायत वार्ड सदस्य, प्रधान, उपप्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्य समेत 30 हजार से ज्यादा जनप्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। खास बात ये है कि इनमें 443 निरक्षर जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। यानी करीब 1.43 फीसदी प्रतिनिधि ऐसे हैं, जिनके पास औपचारिक शिक्षा नहीं है, लेकिन मतदाताओं ने उन पर भरोसा जताकर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है।
निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पंचायतों में सबसे बड़ा वर्ग मैट्रिक पास जनप्रतिनिधियों का है। कुल 13,786 प्रतिनिधि (44.46 फीसदी) इसी श्रेणी से चुने गए हैं। इसके बाद 7,176 उच्च माध्यमिक (23.14 फीसदी) और 5,749 मैट्रिक से कम शिक्षित (18.54 फीसदी) प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं।













