ब्लिट्ज ब्यूरो
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एफबीआई के निदेशक पद के लिए नामित भारतीय-अमेरिकी काश पटेल को सीनेट न्यायपालिका समिति की एक और सुनवाई से गुजरना पड़ सकता है। पोलिटिको के साथ पहली बार साझा किए गए पत्र में सांसदों ने न्यायिक समिति के अध्यक्ष चक ग्रासली (आर-आयोवा) से मनोनीत व्यक्ति के साथ एक और औपचारिक सुनवाई के लिए अनुरोध किया है। सांसद विशेष रूप से उनसे एफबीआई में हाल ही में हुए कार्मिक फेरबदल के बारे में पूछताछ करना चाहते हैं।
काश पटेल का पूरा नाम कश्यप प्रमोद विनोद पटेल है। काश पटेल एफबीआई का नेतृत्व करने के लिए नामित पहले हिंदू भारतीय अमेरिकी के रूप में इतिहास बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 44 वर्ष की उम्र में पटेल ने एक प्रतिष्ठित लेकिन विवादास्पद करियर बनाया है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य, डोनाल्ड ट्रम्प के साथ घनिष्ठ संबंध और खुफिया एजेंसियों पर उनके मुखर विचार शामिल हैं।
काश पटेल का जन्म 25 फरवरी, 1980 को न्यूयॉर्क सिटी में हुआ था। उनके माता-पिता मूल रूप से भारत के गुजरात के रहने वाले थे। रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल की अमेरिका और भारत, दोनों में जड़ों ने उनके करियर और दृष्टिकोण को आकार दिया है।













