अनिल वोहरा
भारत में एक से बढ़कर एक खूबसूरत और आध्यात्मिक स्थान हैं जहां घूमने का आप भी प्लान कर सकते हैं। आजकल लोग सिर्फ घूमने के लिए ही नहीं बल्कि मन को शांति देने और खुद से जुड़ने के लिए भी यात्राएं करने लगे हैं। अगोडा की 2026 ट्रैवल आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार आध्यात्मिक पर्यटन के मामले में भारत एशिया में नंबर 1 बन गया है। भारतीय यात्री ‘आंतरिक घुमक्क ड़ी’ (इनवार्ड वांडरलस्ट) अपना रहे हैं। इसमें घरेलू अन्वेषण, आध्यात्मिक यात्रा और सार्थक अनुभवों पर जोर है। 67% यात्री आराम के लिए यात्रा कर रहे हैं, और भारत एशिया में आध्यात्मिक पर्यटन में अग्रणी बनकर उभरा है। यह रिपोर्ट एशिया के 9 प्रमुख बाजारों (भारत सहित) से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है, जो बताते हैं कि यात्री अब केवल गंतव्य नहीं, बल्कि अनुभव की तलाश कर रहे हैं।
भारत में धार्मिक पर्यटन अब सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर, ‘आध्यात्मिक अनुभव’, सुविधा और आधुनिकता का मिश्रण बन गया है। 2026 तक भारत एशिया में आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है जहां बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया के प्रभाव से यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 19% भारतीय 2026 में स्पिरिचुअल ट्रिप प्लान कर रहे हैं जो बाकी एशियाई देशों से ज्यादा है। अब आध्यात्मिक यात्रा का मतलब सिर्फ मंदिर जाना या पूजा करना नहीं रह गया है। पर्यटकों के लिए ये खुदको रिफ्रेश करने का तरीका बन गया है। जैसे वाराणसी जो दुनिया के सबसे पुराने शहरों में गिना जाता है। यहां लोग गंगा में बोट राइड, घाटों का माहौल और लोकल खाने का मजा लेने भी आते हैं।
योग कैपिटल ऋषिकेश
ऋषिकेश को योग कैपिटल कहा जाता है लेकिन यहां सिर्फ ध्यान और योग ही नहीं बल्कि रिवर राफ्टिंग जैसे एडवेंचर भी मिलते हैं। अमृतसर का गोल्डन टेंपल हर किसी को अपनी ओर खींचता है और उसके बाद वहां का लाजवाब खाना भी लोगों को खूब पसंद आता है। इसी तरह धर्मशाला में तिब्बती कल्चर और पहाड़ों की खूबसूरती मिलकर एक अलग ही शांति का एहसास देती है।
तीर्थ यात्राएं
अगर बात करें तीर्थ यात्राओं की, तो चार धाम यात्रा का क्रेज भी लगातार बढ़ रहा है। अब लोग खुद प्लान करने के बजाय पैकेज टूर ज्यादा पसंद कर रहे हैं ताकि ट्रिप आसान हो जाए। धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा और सुविधाएं दोनों बढ़ रही हैं। 2025 में उत्तर प्रदेश में करीब 164 करोड़ लोग अलग-अलग धार्मिक जगहों पर पहुंचे जिनमें काशी विश्वनाथ धाम और राम जन्मभूमि जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रयागराज में पिछले दिनों हुए महाकुंभ और माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालु संगम पहुंचे।
सीधी भाषा में कहें तो आज की स्पिरिचुअल ट्रैवल सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें घूमना, अच्छा खाना, एडवेंचर और मेंटल पीस भी शामिल है। यही वजह है कि इसका ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। आप भी अगली ट्रिप कुछ ऐसे ही प्लान कर सकते हैं। न केवल सोलो ट्रिप बल्कि परिवार के साथ यात्रा करना भी आपको सुखद एहसास देगा।
भारत में धार्मिक पर्यटन अब सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर, ‘आध्यात्मिक अनुभव’, सुविधा और आधुनिकता का मिश्रण बन गया है। 2026 तक भारत एशिया में आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है जहां बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया के प्रभाव से यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
बने कई प्रमुख धार्मिक कॉरिडोर और हेरिटेज प्रोजेक्ट्स
भारत में हाल के वर्षों में कई प्रमुख धार्मिक कॉरिडोर और हेरिटेज प्रोजेक्ट्स बने हैं या बन रहे हैं, जिनका उद्देश्य तीर्थयात्रियों के लिए दर्शन को आसान बनाना है। प्रमुख कॉरिडोर निम्नलिखित हैं:
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (वाराणसी, यूपी): यह कॉरिडोर वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा के घाटों को आपस में जोड़ता है।
श्री महाकाल लोक कॉरिडोर (उज्जैन, एमपी): उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल लोक का निर्माण किया गया है, जो एक बड़ा धार्मिक स्थल है।
जगन्नाथ मंदिर हेरिटेज कॉरिडोर (पुरी, ओडिशा): पुरी में जगन्नाथ मंदिर के आसपास का क्षेत्र विकसित किया गया है, जिसे 2024 में समर्पित किया गया था।
करतारपुर कॉरिडोर (पंजाब, भारत-पाकिस्तान सीमा): यह विशेष कॉरिडोर भारतीय तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर (पाकिस्तान) जाने की अनुमति देता है।
बांके बिहारी कॉरिडोर (वृंदावन, यूपी): वृंदावन में लगभग 5 एकड़ में बांके बिहारी मंदिर के लिए एक नया कॉरिडोर बन रहा है जो अगले कुछ वर्षों में तैयार होने की उम्मीद है।
अन्य प्रस्तावित और निर्माणाधीन
मध्य प्रदेश में, सरकार 2026 तक राज्य को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए कई कॉरिडोर पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
अन्य राज्यों में भी हेरिटेज कॉरिडोर की योजनाएं चल रही हैं, जैसे छत्तीसगढ़ में सड़कों के नेटवर्क के विकास।













