ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि हाईकोर्ट वैधानिक अपीलीय प्राधिकरणों की भूमिका नहीं निभा सकते, सिर्फ इसलिए कि कार्यवाही में देरी हो रही है। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उन आदेशों को रद किया, जिनमें हाईकोर्ट ने वैधानिक अपील पर फैसला होने देने के बजाय सीधे ही म्यूटेशन विवाद पर फैसला दे दिया था।
कोर्ट की बेंच ने कहा कि जब भूमि अधिकार और पट्टादार पास बुक अधिनियम, 1971 के तहत वैधानिक अपील का विकल्प मौजूद था तो हाईकोर्ट को चाहिए कि वह अपीलीय प्राधिकरण को इस मामले पर फैसला करने देता।
कोर्ट ने कहा,“वैधानिक उपाय इसलिए दिए जाते हैं ताकि पक्षकार अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न मंचों के सामने अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। ऐसी वैधानिक योजनाओं को सिर्फ़ इसलिए रद नहीं किया जा सकता कि उस प्रक्रिया में कुछ देरी हो सकती है।”
कोर्ट ने इस मामले को पेनुकोंडा के राजस्व मंडल अधिकारी के पास वापस भेज दिया, ताकि वे लंबित वैधानिक अपील पर उसके गुण-दोष के आधार पर फ़ैसला कर सकें।













